लेखक ने सुनाये अपने लिखे नाटकों के अंश*

*लेखक  ने सुनाये अपने लिखे नाटकों के अंश*


लखनऊ दिनांक 27.03.2025

लखनऊ की अनादि सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा कीर्ति बल्लभ शांकटायन  की उनके लिखे नाटकों पर आधारित कृति  *परिज्ञानं* का श्रीमती मुन्नी देवी के निर्देशन में संस्कृत भाषा में सफल मंचन संस्कृत संस्थानम, उत्तर प्रदेश के सहयोग से बाल्मीकि रंगशाला में हुआ l लेखक अपने घर आये हुए कवियों को अपने पूर्व में लिखित नाटकों के विषय में बतलाते हैं । सबसे पहले वो अपने प्रिय नाटक *राष्ट्रं भवति सर्वस्वम* के विषय में कवियों के आग्रह पर बतलाते हैं। कैप्टन  प्रमोद सेना में अधिकारी के रूप में कार्य करता  है । संयोग वश उसकी पोस्टिंग उसी शहर में हो जाती है, जहाँ सुधा अपने माता - पिता के साथ रहती है । एक दिन मंदिर में उसकी भेंट सुधा से होती है वे दोनों वर्षो बाद भी एक दूसरे को देखकर पहचान लेते हैं । प्रमोद के बचपन का प्यार उमंगें भरने लगता  है और वो हर समय सुधा की याद में खोया रहता है ।

दूसरे नाटक के अंतर्गत बतलाया गया हैं कि नि:संतान दंपत्ति की पीड़ा कैसी होती है । एक बार बरेली से कलकत्ता जाती चलती ट्रेन में प्रभाकर और उसकी पत्नी रेवती को एक छोटा बच्चा मिलता है । काफी समय तक वो उसके माँ - बाप को ढूंढते हैं पर कोई नहीं मिलता है । प्रभाकर और उसकी पत्नी पुनः उस बच्चे को लेकर वापस बरेली आते हैं । काफी ढूंढने के बाद भी उस बच्चे के माता - पिता नहीं मिलते हैं । प्रभाकर रेवती से कहता है कि इस बच्चे के माता - पिता परेशान  हो  रहे होंगे,चलो इसे हम लोग पुलिस में दे दें । इस पर रेवती  कहती है, पुलिस वाले इसके माँ - बाप न मिलने की दशा में अनाथालय में भेज देंगे । वहां इसकी दुर्गति हो जाएगी, मैं इसे पुलिस में नहीं दूँगी ।

इस पर प्रभाकर रेवती से वचन लेता है कि यदि भविष्य में इसके माँ - बाप मिलते हैं तो तुमको उन्हें इस बच्चे को वापस करना होगा l रेवती भारी मन से प्रभाकर को वचन देती है l  

एक अन्य दृश्य में आपने देश प्रेम पर आधारित नाटक में बतलाते हैं कि एक सैनिक सबसे पहले देश के लिए होता है l कैप्टन प्रमोद अपनी शादी की बात करने सुधा के माँ - बाप के पास आता है l उसी समय युद्ध शुरू होने की सूचना आती है l सुधा के माँ - बाप प्रमोद से मेडिकल आधार पर छुट्टी लेने को कहते हैं पर सुधा कहती है कि मैंने मन से प्रमोद को अपना पति मान लिया है l प्रमोद युद्ध पर जाएं और विजयी होकर वापस आएं l मैं इनका इंतज़ार करुँगी और वर माला प्रमोद को पहना देती है l

नाटक में मंच पर विशाल श्रीवास्तव, राहुल यादव, गिरिराज शर्मा,  गुरुदत्त पांडेय, मुकुल चौहान, मोनिका अग्रवाल, आशीष सिंह, गुलशन यादव अभय प्रताप मित्रा, निरुपमा, राहुल, गीता सिंह, नीलम गुप्ता, नीरज सभी ने सशक्त अभिनय किया। नाटक में  संगीत आदित्य मिश्रा, प्रकाश तमाल बोस, मुख सज्जा राज किशोर गुप्ता एवं मंच सज्जा उमंग फाउंडेशन की थी ।

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