*भारत दुनिया का पावरहाउस: 135 अरब डॉलर रेमिटेंस, 709 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार; लगातार बढ़ रही हिस्सेदारी*
*23 जनवरी वाले हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.05 अरब डॉलर बढ़कर 709.41 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. जो देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक स्तर पर भरोसे को दर्शाता है.*
* विदेशी मुद्रा भंडार में इस मजबूती से जहां हाई टैरिफ की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप असहज महसूस कर सकते हैं, वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की चिंता भी बढ़ सकती है.
* यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एक मजबूत कवच प्रदान करती है.
* मई 2014 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 304 अरब डॉलर के करीब था
*2014 में मोदी सरकार आई, तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 304 अरब डॉलर था. उस समय नीतिगत सुस्ती और चालू खाता घाटे ने अर्थव्यवस्था को कमजोर किया हुआ था. ढांचागत सुधारों ने इसे बदलकर भंडार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.*
■ भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। 2024-25 में देश को 135.4 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 709 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया।
■ बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
■ भारत ना केवल दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस हासिल करने वाला देश बना हुआ है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है।
■ 2024-25 में भारत को कुल 135.4 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला। सबसे बड़ी बात यह रही कि अब भारत आने वाले पैसे में विकसित देशों की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
■ इस बात से पता चलता है कि विदेशों में भारतीय स्किल और प्रोफेशनल वर्कर्स की मांग और कमाई दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
■ पिछले कुछ हफ्तों से, विदेशी मुद्रा बाजार में काफी तेजी देखी जा रही है। इसका पिछला उच्चतम स्तर 704.89 अरब डॉलर था, जो सितंबर 2024 में दर्ज किया गया था। इस भंडार के जरिये देश लगभग 11 महीनों के आयात को कवर कर सकता है। साथ ही यह देश के कुल बकाया विदेशी कर्ज के 94 फीसदी हिस्से के बराबर है।
■ विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का अहम पैमाना होता है। यह न सिर्फ अर्थव्यवस्था की सेहत को दर्शाता है, बल्कि विनिमय बाजार में मुद्रा को संतुलित बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता है।
■ जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतार-चढ़ाव के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बनता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए हस्तक्षेप कर रुपये की गिरावट को थाम सकता है।
■ यही वजह है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार को आर्थिक सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जाता है।
■ विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक आर्थिक समस्या से निपटने के लिए एक लिक्विडिटी बफर देता है।
■ दक्षिण एशिया में भारत के अंदर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जबरदस्त तरीके से आया है।
■ देश ने निवेश के मामले में इंडोनेशिया और वियतनाम को भी पीछे छोड़ दिया।
■ ग्रीनफील्ड निवेश की बात करें तो 2024 में 1,000 से ज्यादा नई परियोजनाओं के साथ भारत दुनिया में चौथे स्थान पर रहा।
■ डिजिटल निवेश के लिए 2020-24 के बीच भारत में 114 अरब डॉलर का सबसे ज्यादा डिजिटल निवेश आया।
*दुनिया के कई देश इस समय कर्ज संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति बहुत अच्छी है। देश पर बाहरी कर्ज एवं जीडीपी का रेश्यो सिर्फ 19.2% है और कुल कर्ज का 5 फीसदी से भी कम है। निर्यात बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत को कम करना होगा। नवाचार, उत्पादकता के साथ देश की मुद्रा और जीडीपी को मजबूत किया जा सकता है।*
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