1973 में भी दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के लिए मचा था हाहाकार, अरब-इजरायल युद्ध ने कैसे बदल दी थी देशों के अर्थव्यवस्था?*

*इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा ऐलान, बोले- 'साथ लड़ने के लिए अरब देशों के साथ गठबंधन बना रहे'*


*1973 में भी दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के लिए मचा था हाहाकार, अरब-इजरायल युद्ध ने कैसे बदल दी थी देशों के अर्थव्यवस्था?*


◆  28 फरवरी को इसराइल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान युद्ध की शुरुआत हुई थी. इसका असर दुनिया की तेल और गैस सप्लाई पर भी पड़ रहा है.

◆  मगर एक युद्ध 1973 में भी हुआ था. उस वक्त भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था. अरब-इसराइल संघर्ष 1973 का योम किप्पुर युद्ध था.

◆  1973 के तेल प्रतिबंध के 50 साल से ज्यादा समय बाद, उस समय की घटना की तुलना आज के संकट से आसानी से की जा सकती है। 

◆  मध्य पूर्व में 6 अक्तूबर 1973 को शुरू हुआ योम किप्पुर युद्ध सिर्फ एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया। 

◆  मिस्र और सीरिया के इजरायल पर अचानक हमले से शुरू हुई इस जंग ने कुछ ही दिनों में वैश्विक राजनीति और तेल बाजार का रुख पूरी तरह बदल दिया।

◆  इजरायली विमानों ने 1967 के युद्ध में मिस्र के कई हवाई अड्डों पर एक साथ आश्चर्यजनक हमला किया, जिसमें मिस्र के पायलट अपने विमानों तक पहुंचने से पहले ही अधिकतर मिग और अन्य लड़ाकू विमान हवाई पट्टियों पर ही नष्ट हो गए। 

◆  थोड़ी देर बाद दूसरे हमले में इजरायली विमानों ने उन हवाई पट्टियों को भी पूरी तरह बेकार कर दिया, जिससे मिस्र की वायुसेना लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गई और वह इस युद्ध में बुरी तरह हार गई।

◆  लेकिन मिस्र और सीरिया अपने खोए हुए भू-भाग को वापस पाने के लिए बेचैन थे और उन्होंने बदला लेने के लिए 6 अक्तूबर 1973 का दिन चुना, जब उन्होंने योम किप्पुर युद्ध की शुरुआत हुई।

◆  इजरायल को संयुक्त राज्य अमेरिका का खुला समर्थन मिला था, जिसके बाद, इजरायल ने मजबूत वापसी की और रिजर्व सेना को बुलाकर अमेरिकी हथियार के साथ लगातार हमले और रणनीति साथ युद्ध में बढ़त हासिल की। हार के डर से मिस्र ने जल्दी ही युद्ध विराम की अपील कर दी।

◆  अमेरिका और सोवियत संघ के भारी दबाव में इजरायल को आगे बढ़ने से रोक दिया गया, जिससे युद्ध समाप्त हो गया। 

◆  इस पूरे युद्ध में मिस्र और सीरिया के कुल 15,600 सैनिक मारे गए जबकि लगभग 35,000 सैनिक घायल हुए।

◆  17 अक्तूबर 1973 को अरब तेल उत्पादक देशों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इस कदम का मकसद साफ था। पश्चिमी देशों को इसरायल का समर्थन छोड़ने के लिए मजबूर करना था।

◆  तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगते ही वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। कुछ ही महीनों में कच्चे तेल की कीमत लगभग चार गुना बढ़ गई। जहां जुलाई 1973 में तेल की कीमत करीब 2.80 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं दिसंबर तक यह 11.65 डॉलर के आसपास पहुंच गई।

◆  इस संकट का सबसे गहरा असर अमेरिका और यूरोप के देशों पर पड़ा, जो सस्ते तेल पर अत्यधिक निर्भर थे। अमेरिका में उद्योगों की लागत बढ़ गई, बेरोजगारी में इजाफा हुआ और आर्थिक मंदी की स्थिति पैदा हो गई।


*इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ईरान का मुकाबला करने के लिए चुपचाप नए क्षेत्रीय गठबंधन बना रहा है. यह इस बात की तरफ इशारा है कि जैसे-जैसे संघर्ष मिडिल-ईस्ट का नक्शा बदल रहा है, इजरायल बड़े सहयोग की तरफ बढ़ रहा है.*


*नेतन्याहू का बयान इस बात की तरफ इशारा करता है कि इज़रायल और अरब वर्ल्ड के कुछ हिस्सों के बीच तालमेल गहराता जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह ईरान की सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर दोनों पक्षों की साझा चिंताएं हैं.*

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