*Exports: व्यापार घाटे को कम करने के लिए योजना; चीन को निर्यात बढ़ाने के साथ आयात निर्भरता घटाने की रणनीति*
*भारत चीन को निर्यात बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए एक विविध रणनीति अपना रहा है।*
* 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात लगभग 37 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया।
* 2024-25 में यह 14.25 अरब डॉलर था।
* संदर्भ के लिए 1997-98 में निर्यात केवल 0.71 अरब डॉलर और आयात 1.11 अरब डॉलर था।
*भारत चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में स्ट्रैटेजिक एप्रोच अपना रहा है। इसका मकसद निर्यात बढ़ाना और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना है। साथ ही धीरे-धीरे चीनी इनपुट पर अपनी निर्भरता कम करना है।*
◆ भारत घरेलू उत्पादन को मजबूत करके और अपने सप्लायर बेस में डायवर्सिफिकेशन लाकर चीन को निर्यात बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ चीनी इनपुट पर निर्भरता जारी रखे हुए है। कारण है कि पूरी तरह से अलग होना संभव नहीं है।
◆ भारत मुख्य रूप से चीन से कच्चा माल, इंटरमीडिएट गुड्स और कैपिटल इक्विपमेंट इंपोर्ट करता है।
◆ इनमें ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और असेंबली, मोबाइल फोन के पुर्जे, मशीनरी और संबंधित पुर्जे और ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) शामिल हैं। ये सभी तैयार उत्पाद बनाने में मदद करते हैं। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलता है।
◆ चीन जो कुछ भी सप्लाई कर रहा है, वह भारत के उत्पादन की रीढ़ है। कुछ टिकाऊ उपभोक्ता सामान भी आ रहे हैं। लेकिन, उनकी संख्या कम है।
◆ व्यापार के आंकड़े इस निर्भरता को दिखाते हैं। साथ ही निर्यात में बढ़ती रफ्तार को भी दर्शाते हैं। 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात लगभग 37 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया। 2024-25 में यह 14.25 अरब डॉलर था।
◆ इसके उलट इसी अवधि के दौरान चीन से आयात 16 फीसदी बढ़कर 113.44 अरब डॉलर से 131.63 अरब डॉलर हो गया। इससे व्यापार घाटा 99.2 अरब डॉलर से बढ़कर 112.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
◆ पिछले वित्तीय वर्ष में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, बिजली के उपकरण, टेलीफोन सिस्टम, झींगा, एल्यूमीनियम सिल्लियां, ब्लैक टाइगर झींगा, जहाज और कुछ कृषि वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में निर्यात में बढ़ोतरी देखी गई है।
◆ इस असंतुलन को दूर करने के लिए सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को तेज करने में जुटी है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम इस पहल का अहम हिस्सा है। यह व्यवसायों को देश के भीतर वैल्यू चेन बनाने में मदद करती है। हालांकि, उद्योगों को अभी भी इंपोर्टेड कैपिटल गुड्स और इंटरमीडिएट इनपुट्स की जरूरत होती है।
◆ इसके अलावा, सरकार उन प्रोडक्ट्स की पहचान कर रही है जिनके लिए चीन पर निर्भरता ज्यादा है और जिनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं। वह ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बाजारों से सोर्सिंग के विकल्पों की तलाश कर रही है।
*ट्रेड फ्लो पर कड़ी नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) का गठन किया गया है। इस पैनल में वाणिज्य विभाग, राजस्व विभाग, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय और वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय के प्रतिनिधि शामिल हैं।*
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