जामुन के औषधीय गुण*

*जामुन के औषधीय गुण*


भारत फलों की विविधता की दृष्टि से अनुपम देश है। यहाँ हर मौसम में स्वादिष्ट व गुणों से भरपूर फल उपलब्ध हो जाते हैं। प्रकृति की ओर से जामुन एक अनमोल तोहफा है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह अनेक रोगों की अचूक औषधि भी है।


जर्मन वैज्ञानिकों ने जामुन पर एक शोध किया। अपनी शोध रिपोर्ट में उन्होंने लिखा है, 'जामुन की पत्तियाँ महिला सेक्स हार्मोन 'प्रोजेस्टिरोन' के स्राव में वृद्धि कर उसे संतुलित रखती हैं और विटामिन 'ई' की सात्मयीकरण की क्रिया को उन्नत करती है।


'आयुर्वेद के प्रमुख आचार्य चरक द्वारा सुप्रसिद्ध ग्रंथ, 'चरक संहिता' में वर्णित औषधीय योग 'पुष्यानुग-चूर्ण' में भी जामुन की गुठली मिलाए जाने का विधान है। इस संहिता के अनुसार जामुन की छाल, पत्ते, फल, गुठलियाँ, जड़ आदि सभी आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाने में काम आते हैं। जामुन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा कैल्शियम भी बहुतायत में पाया जाता है।


जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।"


*काले जामुन के उजले गुण*


  जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में 'जंबोलीन' नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है।


 जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं। अगर भूख कम लगती हो और कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस सिरके को ताजे पानी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह और रात्रि, सोते वक्त एक हफ्ते तक नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है।


  गले के रोगों में जामुन की छाल को बारीक पीसकर सत बना लें। इस सत को पानी में घोलकर 'माउथ वॉश' की तरह गरारा करना चाहिए। इससे गला तो साफ होगा ही, साँस की दुर्गंध भी बंद हो जाएगी और मसूढ़ों की बीमारी भी दूर हो जाएगी।


 विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए। काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बाँधने से घाव स्वच्छ होकर ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है।


  जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है।


 जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।


 जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।


 जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।


 गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।


*सावधानी*


फ्रिज़ में रखे हुए जामुन का सेवन न करें। फ्रिज के फलों से अपच एवं पेट गैस की समस्या होती है।


किसी भी तरह की अंग्रेजी दवाई का सेवन करने वाले व्यक्ति चिकित्सक की सलाह पर जामुन का सेवन करें।


इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन खाने से शरीर में जकड़न एवं बुखार होने की सम्भावना भी रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसके खाने के बाद दूध पीना चाहिये ।।

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