16 श्रृंगार का महत्व

16 श्रृंगार का महत्व

* ऋग्वेद में 16 श्रृंगार सौभाग्य के लिए बताया गया है

* 16 श्रृंगार घर में सुख और समृद्धि लाने के लिए किया जाता है

* भारतीय संस्कृति में 16 श्रृंगार को जीवन का अहम और अभिन्न अंग माना जाता है

* 16 श्रृंगार में पहला श्रृंगार है बिंदी जिसे सुहागिन स्त्रियां परिवार की समृद्धि का प्रतीक मानती हैं

* दूसरा श्रृंगार है सिंदूर जिसे पति अपनी पत्नी के मांग में लगाकर जीवन भर साथ निभाने का वचन देता है इसे सुहाग चिन्ह माना जाता है

* काजल आंखों का श्रृंगार है जिससे आंखों की सुंदरता तो बढ़ती है साथ ही बुरी नजर भी नहीं लगती

* मेहंदी के बिना सुहागन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है माना जाता है मेहंदी जितनी गाढ़ी होगी पति उतना ही प्यार करता है

* पांचवा श्रृंगार है शादी का लाल जोड़ा जो घाघरा चोली ओढनी हो सकती है यूपी-बिहार में यह पीला लाल शुभ है वही महाराष्ट्र में हरा

* दक्षिण भारत की सुहागन स्त्रियां प्रतिदिन अपने बालों में फूलों का गजरा लगाती है

* ऐसी मान्यता है कि नववधू को मांग टीका सिर के ठीक बीचों-बीच इसलिए पहनाया जाता है कि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले

* पति के स्वास्थ्य और धन धान्या में वृद्धि के लिए स्त्रियां नथ पहनती हैं उत्तर भारत में आमतौर पर यह नाक के बाई ओर जबकि दक्षिण भारत में नाक के दोनों और और बीच में भी है

> नथ काफ़ी बड़ी होती है इसलिए स्त्रियां इसे खास मौके पर ही पहनती है लेकिन वह छोटा नोजपिन लौंग पहनी रहती है

* विवाह के बाद स्त्रियों का कानों में कणफूज़्ल (ईयरिंग्स) पहनना जरूरी समझा जाता है ऐसी मान्यता है कि बहू को पति और ससुराल की बुराई करने और सुनने से दूर रहना चाहिए

* गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार पति के प्रति सुहागन स्त्री के वचनवद्धता का प्रतीक माना जाता है

* बाजूबंद कड़े के समान आकृति वाला सोने या चांदी का आभूषण है जो बाहों में पूरी तरह से कसा जाता है ऐसी मान्यता है कि इससे बुराई पर अच्छाई की जीत होती है

* सोने का कंगन अठारहवीं सदी के प्रारंभिक वर्षों से ही सुहाग का प्रतीक माना जाता रहा है ऐसी मान्यता है कि सुहागिन स्त्रियों का कलाई हमेशा चूड़ियों से भरी होनी चाहिए

> कंगन और चूड़ियां खुशी और संतुष्टि का प्रतीक है

* शादी के पहले मंगनी या सगाई के रस्म में वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को अंगूठी को सदियों से पति-पत्नी के आपसी प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है

> भगवान राम ने भी हनुमान के माध्यम से सीता को अंगूठी भेजा था

* कमरबंद कमर में पहना जाने वाला आभूषण है, जिसे स्त्रियां विवाह के बाद पहनती हैं यह इस बात का प्रतीक है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है

* पैरों के अंगूठे में रिंग की तरह पहने जाने वाले इस आभूषण को अरसी या अंगूठा कहा जाता है

> अंगूठा और बिछुआ दुल्हन की हिम्मत का प्रतीक है

* पैरों में पहने जाने वाले पायल की ध्वनि घर के हर सदस्य को नववधू की आहट का संकेत दिलाता है

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