*IMF ने ग्लोबल ग्रोथ में भारत को अमेरिका से रखा आगे, एलन मस्क बोले- बदल रहा पावर बैलेंस*

*IMF ने ग्लोबल ग्रोथ में भारत को अमेरिका से रखा आगे, एलन मस्क बोले- बदल रहा पावर बैलेंस*


*"बैलेंस ऑफ पावर बदल रहा है.": दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क का मानना है कि ग्लोबल इकोनॉमी एक नए दौर में प्रवेश कर रही है.*


*ग्लोबल रियल GDP ग्रोथ-IMF डेटा*


* चीन: 26.6 परसेंट

* भारत: 17 परसेंट

* यूनाइटेड स्टेट्स: 9.9 परसेंट

* इंडोनेशिया: 3.8 परसेंट

* टर्की: 2.2 परसेंट

* नाइजीरिया: 1.5 परसेंट

* ब्राज़ील: 1.5 परसेंट

* वियतनाम: 1.6 परसेंट

* सऊदी अरेबिया: 1.7 परसेंट

* जर्मनी: 0.9 परसेंट


*IMF की डेटा से पता चलता है कि चीन और भारत मिलकर ग्लोबल रियल GDP ग्रोथ में लगभग 44 परसेंट का योगदान देंगे. इससे साफ पता चलता है कि इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार अब पश्चिम को छोड़ पूर्व की ओर बढ़ रही है.*


■  दुनिया के नक्शे पर आर्थिक महाशक्ति की तस्वीर अब बदल रही है. जिस अमेरिका का दशकों तक ग्लोबल इकोनॉमी पर एकछत्र राज था उसे अब भारत कड़ी टक्कर दे रहा है.

■  अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)  ने अपने लेटेस्ट डेटा में अनुमान लगाते हुए यह कहा है कि 2026 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में भारत का योगदान दूसरा सबसे बड़ा होगा. पहले नंबर पर चीन है.

■  IMF ने कहा कि 2026 में ग्लोबल ग्रोथ में अकेले भारत और चीन की हिस्सेदारी 43.6 परसेंट की होगी. अभी पिछले साल ही भारत नॉमिनल GDP के मामले में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना. 

■  लेटेस्ट ग्रोथ रेट  (सेक्टर के आधार पर 6.2 से 7.3 परसेंट) के साथ अब यह चीन को छोड़कर किसी भी दूसरे देश के मुकाबले टोटल ग्लोबल ग्रोथ में सबसे ज्यादा योगदान दे रहा है.

■  एलन मस्क की इस कमेंट को उनकी बिजनेस स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. मस्क बीते कुछ समय से लगातार भारत के संपर्क में हैं और भारत में टेस्ला के लिए जमीन तलाश रहे हैं. जहां एक ओर पश्चिमी देशों और चीन में टेस्ला की बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ गई है तो वहीं भारत की 6.3% की ग्रोथ रेट मस्क के लिए एक बड़े अवसर की तरह है.

■  भारत की इस सफलता के पीछे सिर्फ उसकी बड़ी आबादी नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे पर किया जा रहा भारी खर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेजी है. IMF का मानना है कि भारत की ग्रोथ किसी बाहरी देश के निर्यात पर निर्भर नहीं है बल्कि उसका अपना घरेलू बाजार और मांग इतनी मजबूत है कि वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है.

■  जर्मनी 0.9% और पूरे यूरोप 2% की हालत सुस्त है. वहीं इंडोनेशिया, वियतनाम और नाइजीरिया जैसे उभरते मार्केट अब विकसित देशों को पीछे छोड़ रहे हैं. मस्क का ट्वीट इसी हकीकत की ओर इशारा करता है कि अब ग्लोबल इकोनॉमी का केंद्र पश्चिम से खिसक कर एशिया की ओर आ गया है.


*ओईसीडी ने पिछले साल सितंबर में जो अनुमान जारी किए थे, उनके मुताबिक भारत 2060 तक अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। सदी के अंत तक चीन से लगभग दोगुना बड़ा हो जाएगा। अमेरिका 2040 के दशक में तीसरे स्थान पर खिसक जाएगा। लेकिन, 2070 में फिर से चीन के बराबर आ जाएगा।*

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